नवजात शिशुओं के पोषण के लिए मां का दूध सर्वोत्तम: प्रो.सुषमा नांगिया

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के नियोनेटोलॉजी विभाग की ओर “नियोनेटल न्यूट्रिशन” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के तत्वावधान में आयोजित की गई । कार्यशाला में देशभर के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से आये बाल रोग विशेषज्ञों ने नवजात शिशुओं में पोषण के महत्व पर चर्चा की।
इस अवसर पर नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम की निर्वाचित अध्यक्ष व लेडी हार्डिंग मेडिकल काॅलेज नई दिल्ली की प्रोफेसर सुषमा नांगिया ने कहा कि नवजात शिशुओं के पोषण के लिए मां का दूध सर्वोत्तम है। उन्होंने कहा कि समय से पहले जन्मे और समय पर जन्मे बच्चों को मां का दूध उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तनपान प्रबंधन केेन्द्र खुलने चाहिए जिससे नवजात शिशुओं को सहजता से दूध उपलब्ध हो सके।
प्रो. सुषमा नांगिया ने कहा कि नवजात शिशुओं के प्रबंधन में रुग्णता व शिशु मृत्यु दर को कम करने और उनके न्यूरोलाॅजिकल सर्वाइकल को अक्षुण्ण रखने के लिए नवजात पोषण एक निरंतर विकसित होता हुआ क्षेत्र है।
संस्थान के नियोनेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. कीर्ति एम. नारंजे ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य समय से पहले जन्मे शिशुओं पर विशेष ध्यान देते हुए नवजात पोषण के क्षेत्र में हुई नवीनतम प्रगति से स्वास्थ्यकर्मियों को अवगत कराना था।
इस कार्यशाला का आयोजन बालरोग विशेषज्ञों, नियोनेटोलॉजिस्ट, नर्सों और पोषण विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से किया गया था।
कार्यशाला में बीएचयू वाराणसी से प्रोफेसर अशोक कुमार,केजीएमयू से प्रो. माला कुमार, एम्स जोधपुर से डॉ. नीरज गुप्ता, मेदांता, लखनऊ से डॉ. आकाश पंडिता, डॉ. पियाली भट्टाचार्य, डॉ. संजय निरंजन व डॉ. निरंजन सिंह,डॉ. अनीता सिंह, डॉ. आकांक्षा वर्मा, डॉ. अभिषेक पॉल और डॉ. अभिजीत रॉय ने अपने विचार रखे।






