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मणिपुर का समाधान गोलियों से नहीं, दिलों से निकलना चाहिए

असम-    राहुल गांधी का नुस्खा गलत है क्योंकि गांधी संघर्षग्रस्त पूर्वोत्तर राज्य में सेना के हस्तक्षेप का सुझाव दे रहे हैं। हिमंत ने कहा, मणिपुर की स्थिति का समाधान गोलियों से नहीं दिलों से निकलना चाहिए। अपने बयान में हिमंता ने कहा कि भारतीय वायु सेना ने आइजोल में भी यही किया। बमबारी के बाद हिंसा कम हो रही थी। आज राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय सेना को मणिपुर में हिंसा रोकनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि इसका मतलब क्या है? क्या उन्हें नागरिकों पर गोलियां चलानी चाहिए?

राहुल गांधी पर पलटवार
राहुल गांधी पर पलटवार करत हुए हिमंत ने कहा, “क्या यह उनका नुस्खा है? वह ऐसा कैसे कह सकते हैं? सेना कुछ भी हल नहीं कर पाएगी। वे केवल कुछ समय के लिए शांत हो पाएंगे और अस्थायी शांति ला पाएंगे।” उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मांग की कि प्रधानमंत्री मोदी को मणिपुर पर बोलना चाहिए और जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो वे बाहर चले गए। इससे उनका मंसूबा पूरी तरह उजागर हो गया कि विपक्ष की मंशा का मणिपुर से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वे सिर्फ संसद को बाधित करना चाहते थे। पीएम मोदी ने अपने दिल की बात कही। उन्होंने मणिपुर के लोगों के प्रति अपना स्नेह भी दिखाया। एक प्रमुख पार्टी के रूप में, उन्हें प्रधानमंत्री का भाषण आखिरी तक सुनना चाहिए था।

राहुल ने क्या कहा था
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज कहा था कि प्रधानमंत्री कम से कम मणिपुर जा सकते थे, समुदायों से बात कर सकते थे और कह सकते थे कि मैं आपका पीएम हूं, आइए बात शुरू करें लेकिन मुझे कोई इरादा नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि क्या पीएम मोदी 2024 में पीएम बनेंगे, सवाल मणिपुर का है जहां बच्चे, लोग मारे जा रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय सेना इस नाटक को 2 दिनों में रोक सकती है लेकिन पीएम मणिपुर को जलाना चाहते हैं और आग को बुझाना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कल PM मोदी ने संसद में करीब 2 घंटे 13 मिनट तक बोला।

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