बेतवा नदी के कैचमैंट में हमीरपुर में झांसी के बेखौफ पट्टाधारक ने किया मोरम का अवैध खनन
मुख्यालय से आई जांच टीम को जिगनी में प्रतिबंधित पोकलैण्ड मशीनों से किये गये मोरम के अवैध खनन के तालाबनुमा गहरे गढ्ढे तो नजर आये, गढ्ढों में पानी भरे होने से टीम को बिना जांच के ही बैरंग लौटना पड़ा

जन एक्सप्रेस/हमीरपुर : उत्तर प्रदेश के ईमानदार मुख्यमंत्री की रोक के बावजूद हमीरपुर के जिगनी में झांसी के खरवांच मोरम खण्ड-2 के पट्टाधारक मेसर्स भरोसा सरकार कांट्रैक्टर एण्ड सप्लायर, के प्रोप्राईटर संचालक उरई निवासी बेखौफ महेन्द्र राजपूत और उनके गुर्गो ने भारी भरकम प्रतिबंधित पोकलैण्ड मशीनों से हमीरपुर की सीमा में कांटा लगाकर किया जमकर खुलेआम मोरम का अवैध खनन करने के साथ ही अवैध परिवहन। जबकि इस मामले में हैरान कर देने वाली खास बात ये रही कि, खण्ड का संचालक हमीरपुर की सीमा में मोरम का खुलेआम अवैध खनन करता रहा, जबकि खनिज विभाग की टीम को हमीरपुर की सीमा में इस खण्ड का कांटा लगा नहीं दिखा। हालांकि खनिज विभाग की टीम ने पूर्व में भी हमीरपुर की सीमा क्षेत्र के जिगनी में छापा मारकर इस खण्ड के प्रोप्राईटर संचालक महेन्द्र राजपूत द्वारा किये जा रहे मोरम के अवैध खनन को पकड़ने के साथ ही पट्टाधारक के खिलाफ जुर्माने की कार्यवाही की गई थी, वही जिगनी निवासी सुरेन्द्र सिंह परिहार की इस मामले में खनन निदेशक माला श्रीवास्तव से की गई शिकायत के बाद पड़ी फटकार से हरकत में आई हमीरपुर खनिज विभाग की टीम ने आनन फानन में 22 जून 2025 को जिगनी पहुँचकर खण्ड के प्रोप्राईटर और संचालक उरई निवासी महेन्द्र राजपूत द्वारा नदी के कैचमैंट में स्थापित गाटा संख्या –1271 में 2244 घन मीटर मोरम का अवैध खनन करते पकड़े जाने के बाद जुर्माने की कार्यवाही भी की थी, जबकि खण्ड संचालक महेन्द्र राजपूत ने करीब एक हजार मीटर लंबा, वही करीब बीस फिट गहरा, जबकि करीब पचास फिट चौड़े क्षेत्र में हमीरपुर की सीमा में शासन प्रशासन की रोक के बावजूद एनजीटी के नियमों को ताख पर रखकर मोरम का अवैध खनन किया गया है, जबकि शासन में की गई जिगनी निवासी सुरेन्द्र सिंह परिहार की इस मामले में शिकायत के बाद मुख्यालय से आई जांच टीम की अगुवाई कर रहे डाक्टर फहद जमाली जब जिगनी पहुंचे तो उन्हें जिगनी में बड़े पैमाने पर किया गये मोरम के अवैध खनन किया गया साफ तौर पर नजर आया, साथ ही अवैध खनन के लिये प्रतिबंधित पोकलैण्ड मशीनों से किये गये गढ्ढे भी साफ नजर आये, हालांकि अवैध खनन क्षेत्र में पानी भरे होने से मुख्यालय से आई टीम को बिना जांच के ही बैरंग लौटना पड़ा, क्योंकि अवैध खनन की जांच करते वख्त टीम को लम्बाई, चौडाई और गहराई का आकलन करने के बाद ही पट्टाधारक के खिलाफ कार्यवाही तय की जाती है।






