जलजीवन मिशन की ‘हर घर नल-जल योजना सरकारी दावों की खोल रही पोल

जन एक्सप्रेस/हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के हरपालपुर क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत मलौथा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (हर घर नल-जल योजना) सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 313.56 लाख रुपये की लागत से निर्मित पानी की टंकी पिछले एक महीने से बंद पड़ी है, जिससे भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना शुरू होने के बाद कुछ दिनों तक ही घरों में नलों के जरिए पानी पहुंचा, लेकिन उसके बाद जलापूर्ति अचानक बंद हो गई। वर्तमान में ग्रामीणों को पेयजल के लिए हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी और गिरते जलस्तर के कारण कई हैंडपंप भी पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
गांव में सुबह से ही पानी भरने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को पानी के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। वहीं पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि योजना के तहत किए गए कार्य भी अधूरे हैं। कई मोहल्लों और गलियों में अब तक मुख्य पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है। जिन स्थानों पर पाइपलाइन डालने के लिए सड़कें खोदी गई थीं, उन्हें दोबारा ठीक नहीं कराया गया, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। कई घरों के बाहर जलापूर्ति के पाइप खुले पड़े हैं और उनमें टोटियां तक नहीं लगाई गई हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित विभाग ने अधूरा कार्य छोड़ दिया, जबकि कागजों में योजना को पूर्ण दिखाया जा चुका है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जल निगम के अधिकारियों से जल्द जलापूर्ति बहाल कराने तथा अधूरे कार्यों को पूरा कराने की मांग की है।
ग्रामीणों की जुबानी
विजय पाल, ग्रामीण (मलौथा)
“313 लाख रुपये की योजना सिर्फ कागजों में चल रही है। ठेकेदार और अधिकारियों की लापरवाही के कारण गांव के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं।”
योगेश कुमार, ग्रामीण (मलौथा)
“पाइपलाइन डालने के लिए सड़कें खोदी गई थीं, लेकिन उन्हें ठीक नहीं कराया गया। आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
नरेन्द्र कश्यप, ग्रामीण (मलौथा)
“हैंडपंपों का जलस्तर नीचे चला गया है। पीने के पानी के साथ-साथ मवेशियों के लिए पानी जुटाना भी मुश्किल हो गया है।”
रोहित कुमार, ग्रामीण (मलौथा)
“काम अभी भी अधूरा है। कई गलियों में पाइपलाइन नहीं बिछी है और जहां पाइप लगाए गए हैं, वहां टोटियां तक नहीं लगाई गई हैं।”





