यूपी में 1 लाख लापता, FIR में 17 महीने की देरी पर हाईकोर्ट सख्त
यूपी में 1 लाख से ज्यादा लोग लापता: हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई कड़ी फटकार, बताया सिस्टम की विफलता

जन एक्सप्रेस/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लापता लोगों के मामलों ने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2024 से अब तक प्रदेश में 1,08,300 से अधिक लोग लापता दर्ज किए गए हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 9 प्रतिशत से भी कम, महज़ 9,700 मामलों में ही कोई ठोस कार्रवाई हो सकी है।
इन आंकड़ों को सामने रखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पुलिस की लापरवाही को “बेहद गंभीर” बताते हुए मौजूदा हालात को ‘सिस्टम की विफलता’ करार दिया। 17 महीने बाद FIR! कोर्ट हैरान सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कई मामलों में FIR दर्ज करने में 17 महीने तक की देरी की गई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि गुमशुदगी के शुरुआती घंटे सबसे अहम होते हैं और ऐसे में पुलिस की सुस्ती पीड़ित परिवारों के लिए दोहरी सजा बन जाती है।
सबूत खुद मिटा रहा सिस्टम हाईकोर्ट ने उन सरकारी नियमों पर भी कड़ी आपत्ति जताई, जिनके तहत CCTV फुटेज जैसे अहम डिजिटल सबूत कुछ ही महीनों में डिलीट हो जाते हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सबूतों का इस तरह नष्ट हो जाना न्यायिक प्रक्रिया के लिए एक बड़ा खतरा है। लापता मामलों में उदासीन रवैया अदालत ने कहा कि गुमशुदगी के मामलों को अक्सर गंभीर अपराध की तरह नहीं लिया जाता, जबकि इनमें मानव तस्करी, अपहरण और संगठित अपराध की आशंका होती है। कोर्ट ने पुलिस से जवाबदेही तय करने और जांच प्रणाली में तुरंत सुधार के संकेत दिए।
सवाल जो अब टाले नहीं जा सकते 1 लाख से ज़्यादा लापता लोग आखिर गए कहां? पुलिस समय पर FIR क्यों नहीं दर्ज कर रही?
डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने की व्यवस्था क्यों नहीं? हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणियों के बाद अब निगाहें सरकार और पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस चेतावनी के बाद व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव होगा, या फिर लापता लोग सिर्फ आंकड़ों में ही गुम होते रहेंगे।






