देहरादून

राहुल गांधी का सीधा संवाद: बोले- परीक्षाएं कराना सरकार की जिम्मेदारी, निजी कंपनियों की नहीं

भारी बारिश के बावजूद उमड़ा युवाओं का सैलाब, संवाद को बनाया राजनीति से ऊपर का मंच

जन एक्सप्रेस/देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम राजनीतिक रैली से अधिक युवाओं के खुले संवाद का मंच बनकर उभरा। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों, अभ्यर्थियों और अभिभावकों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। बन्नू स्कूल परिसर में बड़ी संख्या में पहुंचे युवाओं ने कार्यक्रम को ऊर्जा और गंभीरता दोनों प्रदान की।मंच पर पहुंचते ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पारंपरिक राजनीतिक भाषण देने के बजाय सीधे छात्रों के बीच संवाद का रास्ता चुना। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को मंच पर आमंत्रित किया और भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक, रोजगार तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े उनके अनुभव और समस्याएं सुनीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल किसी राजनीतिक सभा से अधिक युवाओं के विचार-विमर्श जैसा दिखाई दिया।राहुल गांधी ने कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह “स्टूडेंट्स सेंट्रिक” होनी चाहिए, जिसमें छात्रों के हित सर्वोपरि हों। उन्होंने सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र और प्रक्रिया में रैंडमाइजेशन होना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि परीक्षाएं आयोजित कराना सरकार की जिम्मेदारी है, किसी निजी कंपनी की नहीं। यदि कोई व्यक्ति या गिरोह पेपर लीक जैसी घटनाओं में शामिल पाया जाता है तो उसके विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता पर जोर देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों पर किसी भी राजनीतिक दल का प्रभाव नहीं होना चाहिए। कुलपतियों और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां योग्यता और निष्पक्षता के आधार पर हों, न कि राजनीतिक विचारधारा के आधार पर।पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिन युवाओं का भविष्य ऐसी घटनाओं से प्रभावित हुआ है, उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने एक छात्रा की आत्महत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी दुखद घटनाओं के बाद भी व्यवस्था की संवेदनहीनता चिंता का विषय है।

कार्यक्रम में ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े शिक्षक अभिनय शर्मा ने भी नई शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति लागू तो कर दी गई, लेकिन उसका प्रभावी क्रियान्वयन अभी भी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में प्रश्नों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए छात्रों से शुल्क लिए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि देश में पेपर लीक एक संगठित उद्योग का रूप ले चुका है, जिसे रोकने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि राहुल गांधी का पूरा संबोधन शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य पर केंद्रित रहा। उन्होंने अपने भाषण में न तो भारतीय जनता पार्टी पर कोई राजनीतिक हमला बोला और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अथवा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कोई उल्लेख किया। इससे कार्यक्रम पूरी तरह शिक्षा और युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित बना रहा।इस संवाद कार्यक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में भी नई चर्चा को जन्म दिया। भारी बारिश के बावजूद युवाओं की बड़ी भागीदारी ने यह संकेत दिया कि शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता जैसे मुद्दे राज्य के युवाओं के लिए सबसे अहम हैं।देहरादून पहुंचने पर राहुल गांधी का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान हादसे में जान गंवाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता अमर मेहता के आवास पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की और शोक संवेदना व्यक्त की। राहुल गांधी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि दुख की इस घड़ी में कांग्रेस का पूरा परिवार उनके साथ खड़ा है।कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत, प्रीतम सिंह सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, विधायक एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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