
जन एक्सप्रेस: बरेली से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न सिर्फ शिक्षा विभाग को शर्मसार किया है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक पाकिस्तानी महिला ने फर्जी दस्तावेजों के दम पर उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में पूरे नौ साल तक बतौर शिक्षक नौकरी की और हर महीने वेतन भी उठाती रही।
इस महिला ने सरकारी स्कूल में मासूम बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा भी संभाला, जबकि असलियत ये थी कि वह भारतीय नागरिक थी ही नहीं। मामला तब उजागर हुआ जब दस्तावेजों की गहन जांच हुई और महिला की असली पहचान सामने आई। तत्काल प्रभाव से महिला को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है और उस पर अब तक मिले वेतन की वसूली के आदेश भी दिए गए हैं।
‘गुरुजी’ निकली जासूस या धोखेबाज़?: जांच में जुटी एजेंसियां, पूरे नेटवर्क की तलाश जारी
कागज़ों में गड़बड़झाला, सिस्टम की चूक या अंदरूनी मिलीभगत?
इस प्रकरण ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर यह महिला इतने वर्षों तक कैसे न केवल विभाग की आंखों में धूल झोंकती रही, बल्कि सरकारी तंत्र को भी ठेंगा दिखाती रही।खुफिया एजेंसियों और पुलिस की 8 टीमें इस महिला की तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही हैं। जांच एजेंसियां महिला के भारत में प्रवेश, पहचान पत्रों की वैधता और उसके पीछे छिपे किसी संभावित साजिश की भी जांच कर रही हैं।इसके अलावा अब यह भी पड़ताल की जा रही है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे, क्या विभाग के भीतर से भी किसी ने मदद की, और इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे मुमकिन हुई।बरेली का यह मामला अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है और लोग पूछ रहे हैं – क्या सरकारी तंत्र इतना लापरवाह हो चुका है कि विदेशी नागरिक वर्षों तक मासूम बच्चों का भविष्य संवारने का नाटक करता रही।






