
जन एक्सप्रेस हरिद्वार। आम्रकुंजों के बीच बसा देव संस्कृति विश्वविद्यालय शिक्षण संस्थान के साथ ही यह अध्यात्म, साधना और संस्कारों का जीवंत केंद्र है। इसी परिसर विश्वविद्यालय परिसर में विराजमान हैं सिद्धेश्वर महादेव, जिन्हें श्रद्धा और प्रेम से सिद्धेश्वर महाकाल के नाम से जाना जाता है। यह पावन शिवलिंग गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माताजी भगवती देवी शर्मा जी द्वारा स्थापित किया गया था। माताजी के तप, साधना और दिव्य प्रेरणा से यह स्थान आज एक आध्यात्मिक शक्ति केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित है, जहाँ प्रतिदिन भक्ति और श्रद्धा का अखंड प्रवाह बहता है।यहाँ विद्यार्थी पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन में भक्ति, अनुशासन, समर्पण और आत्मिक संतुलन जैसे गुणों का विकास भी करते हैं। यज्ञ, ध्यान और रुद्राभिषेक की परंपरा विद्यार्थियों और परिजनों को मानसिक एकाग्रता एवं आत्मिक शांति प्रदान करती है। मंदिर में परिसर में जन्मदिन, विवाह दिवस आदि पर गायत्री दीप महायज्ञ का आयोजन भी होता है। जब सैकड़ों दीपक प्रज्वलित होकर परिसर को आलोकित करते हैं, तो तमसो मा ज्योतिर्गमय का संदेश साकार रूप में प्रकट होता है।
युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी कहते रहे हैं कि शिक्षा का उद्देश्य बौद्धिक विकास के साथ चारित्रिक और आध्यात्मिक उत्कर्ष भी है। सिद्धेश्वर महादेव मंदिर इसी विचारधारा का जीवंत उदाहरण है। यहाँ विद्यार्थी शिवलिंग के समक्ष नमन करते हुए ईश्वर की आराधना करते हैं और अपने भीतर के शिवत्व शांति, संतुलन और दिव्यता को भी जाग्रत करते हैं। जब भक्ति गीतों और दीपों की रश्मियाँ वातावरण को गुंजायमान करती हैं, तब सिद्धेश्वर महादेव मंदिर वास्तव में देव संस्कृति विश्वविद्यालय का आध्यात्मिक केंद्र एवं प्रेरणा स्रोत बन जाता है।





