सरपतहा पुलिस की कार्रवाई पर अदालत की सख्त टिप्पणी, एसपी को जांच के आदेश जन एक्सप्रेस

जन एक्सप्रेस | जौनपुर
जौनपुर के सरपतहा थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर न्यायालय की सख्त टिप्पणी के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में अदालत ने आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए उसका रिमांड खारिज कर दिया है। साथ ही पुलिस अधीक्षक (एसपी) जौनपुर को पूरे मामले की जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
गिरफ्तारी प्रक्रिया पर अदालत की आपत्ति
मामला ग्राम गैरवाह बड़कापुरा निवासी अखिलेश सिंह से जुड़ा है। सरपतहा पुलिस ने उन्हें गांजा बरामदगी के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। पुलिस अभिलेखों के अनुसार उनके पास से 4 किलो 15 ग्राम गांजा बरामद हुआ था।
अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ/विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट), जौनपुर ने मामले की सुनवाई के दौरान गिरफ्तारी मेमो में कई विरोधाभास पाए। न्यायालय के अनुसार पुलिस ने एक ओर आरोपी को उसके अधिकारों की जानकारी देने का उल्लेख किया, वहीं दूसरी ओर यह भी दर्ज किया कि गिरफ्तारी आवश्यक नहीं थी।
अदालत ने माना कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 36, 38 एवं 47 का पालन नहीं किया गया। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की अवहेलना भी परिलक्षित हुई। इसके आधार पर अदालत ने आरोपी का रिमांड खारिज कर दिया तथा उसे एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।

बरामदगी की मात्रा को लेकर उठे सवाल
मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि आरोपी के पास से पुलिस रिकॉर्ड में दर्शाई गई मात्रा से कहीं अधिक, लगभग 25 किलो गांजा बरामद हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि वास्तविक बरामदगी को कम दर्शाया गया।
वहीं आरोपी के परिजनों का आरोप है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। परिजनों के अनुसार उनके पास एक वीडियो भी है, जिसमें घर के पीछे एक बोरी रखी दिखाई दे रही है। उनका दावा है कि उक्त बोरी में गांजा रखा गया था और उन्हें साजिश के तहत फंसाने का प्रयास किया गया।
हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरे व्यक्ति को छोड़ने के आरोप
ग्रामीणों और आरोपी के परिजनों का यह भी आरोप है कि उसी दिन गैरवाह निवासी करन सिंह उर्फ लव सिंह को कथित रूप से गांजा बेचते हुए पकड़ा गया था। उनका कहना है कि दुकान से गांजा मिलने का वीडियो भी सामने आया है, लेकिन उसके विरुद्ध कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और न ही किसी बरामदगी की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की गई।
इन आरोपों के चलते एक ही प्रकरण में दो व्यक्तियों के साथ अलग-अलग व्यवहार किए जाने को लेकर पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इस संबंध में पुलिस का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अदालत के आदेश और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब पूरे मामले में एसपी जौनपुर की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो मामला केवल प्रक्रियागत त्रुटि तक सीमित न रहकर जवाबदेही और निष्पक्ष जांच का विषय बन सकता है।
फिलहाल, सरपतहा थाना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर जिले में व्यापक चर्चा जारी है।






