
जन एक्सप्रेस /हरिद्वार: दुनिया के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल हार्वर्ड विश्वविद्यालय में भारतीय अध्यात्म और वैज्ञानिक चिंतन पर चर्चा हुई। अखिल विश्व गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी वर्ष 2026 के वैश्विक अभियान के तहत देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने हार्वर्ड में ‘Human Flourishing’ यानी मानवीय उत्कर्ष विषय पर अपना पक्ष रखा।
हार्वर्ड पोस्टडॉक्टोरल एसोसिएशन के विशेष आमंत्रण पर अमेरिका पहुंचे डॉ. पण्ड्या ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया जिन नैतिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रही है, उनका समाधान केवल तकनीकी विकास में नहीं है। इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समर्थ अध्यात्म और मानवीय मूल्यों के समन्वय की आवश्यकता है।
वैज्ञानिक अध्यात्म को बताया मानवीय विकास का आधार
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने भारत के युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के वैज्ञानिक अध्यात्म के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्म परिष्कार, नैतिकता और संवेदनशीलता विश्व शांति तथा सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ते हुए मानवीय चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं ने पूछे सवाल
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और फैकल्टी सदस्यों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, चेतना विज्ञान तथा आधुनिक अनुसंधान में इसके संभावित प्रयोग को लेकर कई सवाल पूछे।
डॉ. पण्ड्या ने तर्क, तथ्य और प्रमाण के आधार पर सवालों के जवाब दिए और भारतीय चिंतन परंपरा की गहराई तथा उसकी समकालीन प्रासंगिकता को सामने रखा।
कार्यक्रम के दौरान हार्वर्ड पोस्टडॉक्टोरल एसोसिएशन की प्रोफेशनल डेवलपमेंट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन शर्मा ने डॉ. पण्ड्या का स्वागत किया।
वैश्विक अभियान का हिस्सा है हार्वर्ड कार्यक्रम
शांतिकुंज मीडिया विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. चिन्मय पण्ड्या जन्मशताब्दी वर्ष 2026 के वैश्विक अभियान के तहत विदेश दौरे पर हैं। अभियान का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को विश्वभर में पहुंचाना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक अध्यात्म को वैश्विक मंचों तक ले जाना है।
हार्वर्ड में आयोजित यह कार्यक्रम इसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, मानवीय मूल्यों और वैज्ञानिक अध्यात्म पर वैश्विक शैक्षणिक जगत में संवाद को बढ़ावा देना है।
-सीपी बहुगुणा






