कानपुर में डिजिटल अरेस्ट गिरोह का खुलासा, 48 लाख की ठगी में तीन गिरफ्तार; 611 खातों में पहुंची रकम

कानपुर से विवेक पांडे की रिपोर्ट
जन एक्सप्रेस / कानपुर: कानपुर पुलिस कमिश्नरेट की साइबर थाना पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी कार्रवाई करते हुए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वासु, आतिश कुमार और कंचन प्रजापति के रूप में हुई है। वहीं मामले में आरोपी मुकुल चौबे अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगाई गई हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। गिरोह के सदस्य पहले लोगों को फोन करके खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का वरिष्ठ अधिकारी बताते थे। इसके बाद बातचीत को अपने दूसरे साथी के पास ट्रांसफर कर दिया जाता था। दूसरा आरोपी खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराता-धमकाता था।
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर करते थे ठगी
आरोपी पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनके खिलाफ गंभीर कानूनी मामला दर्ज है और जांच एजेंसियां उनके बैंक खातों तथा अन्य वित्तीय गतिविधियों की जांच कर रही हैं। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पीड़ित और उसके परिवार को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती थी।
इसी तरह के एक मामले में कानपुर के स्वरूपनगर निवासी योगेश चंद्र मिश्रा को भी फोन किया गया। आरोपियों ने खुद को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए उन्हें डराया और अलग-अलग बैंक खातों में करीब 48 लाख 20 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए।
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम एक खाते में रुकने के बजाय कई बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। इससे पुलिस को गिरोह के बड़े नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी मिली।
फर्जी दस्तावेजों से बनाई कंपनी
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपियों ने अपने आधार कार्ड और पैन कार्ड में कथित कूटरचना कर खुद को प्रतापगढ़ का निवासी दर्शाया था। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर BAUKOYO CONTRACTORS PRIVATE LIMITED नाम से एक फर्जी फर्म रजिस्टर्ड कराई गई।
पुलिस के अनुसार, इसी फर्म के नाम पर खोले गए बैंक खाते में 15 अलग-अलग लेनदेन के जरिए करीब 25.98 लाख रुपये जमा कराए गए। इसके बाद इस रकम को उसी दिन देश के अलग-अलग राज्यों में मौजूद करीब 611 बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
मोबाइल से मिले अहम डिजिटल सबूत
गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में पुलिस को साइबर ठगी से जुड़े कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इनमें घटना में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जानकारी, फर्जी फर्म से जुड़े दस्तावेज, आपराधिक कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।
पुलिस ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर भी खातों की जांच की। जांच के दौरान सामने आया कि इन बैंक खातों से जुड़े मामलों में देश के अलग-अलग राज्यों में चार साइबर अपराध शिकायतें दर्ज हैं।
पुलिस के मुताबिक, इन शिकायतों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब तक करीब 1.42 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का अनुमान लगाया गया है।
फरार आरोपी की तलाश जारी
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों और पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। मामले में वांछित आरोपी मुकुल चौबे की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
साइबर पुलिस इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने की प्रक्रिया की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।






