कानपुर में ‘स्याही से शहादत तक’ पुस्तक का लोकार्पण
‘आजादी और उसकी सरहद’ पर हुआ तिलक स्मृति व्याख्यान

कानपुर से विवेक पांडे की रिपोर्ट
जन एक्सप्रेस / कानपुर: कानपुर में जर्नलिस्ट एंड एक्टिविस्ट फोरम की ओर से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शास्त्री भवन, लोक सेवक मंडल, खलासी लाइन में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘स्याही से शहादत तक’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम को श्री तिलक जी की स्मृति को समर्पित किया गया।
इसी अवसर पर श्री तिलक स्मृति व्याख्यान का भी आयोजन हुआ। व्याख्यान का विषय ‘आजादी और उसकी सरहद’ रखा गया। कार्यक्रम में पत्रकारिता, सामाजिक सरोकार और देश की आजादी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।
‘आजादी और उसकी सरहद’ विषय पर हुआ व्याख्यान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजीव शुक्ला ने ‘आजादी और उसकी सरहद’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने आजादी के महत्व, उसके लिए किए गए संघर्ष और आजादी के साथ जुड़ी जिम्मेदारियों पर चर्चा की।
वक्ताओं ने कहा कि आजादी केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि इसके पीछे लंबे संघर्ष और बलिदान का इतिहास जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अनेक लोगों ने देश के लिए संघर्ष किया और अपनी भूमिका निभाई। आजादी के बाद लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को मजबूत बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने आजादी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के अधिकारों के साथ उनकी जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। समाज और देश के प्रति अपने दायित्वों को समझना लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

‘स्याही से शहादत तक’ पुस्तक पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान ‘स्याही से शहादत तक’ पुस्तक को लेकर भी चर्चा हुई। पुस्तक के माध्यम से लेखनी, पत्रकारिता और देश के लिए किए गए संघर्ष के बीच संबंधों को सामने रखने का प्रयास किया गया है।
वक्ताओं ने पत्रकारिता की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि कलम समाज में जागरूकता पैदा करने और महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाने का माध्यम रही है। पत्रकारिता के जरिए सामाजिक मुद्दों, जन सरोकारों और व्यवस्था से जुड़े विषयों को लोगों तक पहुंचाया जाता है।
कार्यक्रम में मौजूद पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता केवल खबरों को लोगों तक पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में संवाद और जागरूकता पैदा करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने पर जोर
आयोजकों के मुताबिक, श्री तिलक की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य उनके विचारों और सामाजिक सरोकारों को याद करने के साथ-साथ आजादी से जुड़े विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाना था।
कार्यक्रम में कहा गया कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को देश के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं। आजादी के संघर्ष और उससे जुड़े मूल्यों को समझना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
शास्त्री भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुस्तक लोकार्पण, स्मृति व्याख्यान और विचार-विमर्श के जरिए श्री तिलक जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही।
कार्यक्रम आयोजक रोहित अवस्थी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के जरिए पत्रकारिता, सामाजिक सरोकार और इतिहास से जुड़े विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।






