उत्तराखंड

डोईवाला में इंटीग्रेटेड टाउनशिप बनाने को लेकर क्षेत्रीय जनता में रोष: हरीश रावत

देहरादून । डोईवाला में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड टाउनशिप के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पर्यावरणीय भू-गर्भीय, आर्थिक व शहरीकरण के दृष्टिकोण से यह सोच ही गलत है। इस योजना से किसान खत्म होगा, डोईवाला चीनी मिल व किसान बुरी तरह से प्रभावित होगा। रावत ने कहा कि इस योजना से देहरादून का फेफड़ा पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि रायपुर से श्यामपुर तक समस्त वन क्षेत्र नष्ट हो जाएगा और सारा भार फेफड़े पर आ जाएगा। रावत ने कहा कि एक तरफ हरिद्वार व रुड़की दूसरी तरफ देहरादून, डोईवाला, रायवाला, श्यामपुर, ऋषिकेश इत्यादि में इस तरह की परिकल्पना भी भयावह है। रावत ने कहा कि प्रत्येक दृष्टिकोण से यह एक अनमैनेजेबल कॉन्सेप्ट है। पर्वतीय राज्य का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। ग्लोबल मैकेन्जी कम्पनी की आड़ में उत्तराखण्ड की धरोहर के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बद्रीनाथ में रि-डवलपमेंन्ट के नाम पर, नमामि गंगे के नाम पर खुली लूट की जा रही है। रावत ने यह भी कहा कि इस योजना से जहां एक ओर पर्यावरण का नुकसान है, कास्तकारों का नुकसान है, वहीं रोजगार का भी बड़ा सकट खड़ा होगा।

प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि समाचार पत्रों द्वारा जानकारी प्राप्त हुई है कि प्रदेश सरकार द्वारा डोईवाला के निकट माजरी ग्राम, मारखंमग्रान्ट, अन्य ग्रामीण क्षेत्र व डोईवाला नगर पालिका के भी कुछ क्षेत्र में नए शहर बसाने की योजना बनाई गई है । इस खबर से क्षेत्रीय जनता में डर का माहौल बना हुआ है । डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में ज्यादातर लोग खेती से जुड़े हैं, जहाँ बड़ी मात्रा में गन्ना व अन्य फसल का उत्पादन होता है । सरकार द्वारा प्रस्तुत एक नक्शे में यह दर्शाया गया है कि नई टाउनशिप के लिए करीब 3080 हेक्टेयर भूमि चयनित की गई है, जिसमें 747 हेक्टेयर सरकारी भूमि व करीब 2334 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसे सरकार द्वारा अधिग्रहीत करने की तैयारी चल रही है। राज्य में केवल 28 प्रतिशत भूमि कास्तकारों के पास हैं बाकी भूमि वन विभाग की है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा कृषि भूमि को इस तरह समाप्त करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

माहरा ने बताया कि 1100 करोड़ की धनराशि भी इस योजना के लिए स्वीकृत की गयी है तथा किच्छा में भी इसी तरह कुत्सित प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. राव को केन्द्र सरकार द्वारा इस काम के लिए नियुक्त भी किया जा चुका है। माहरा ने कहा कि इसे हास्यापद ही कहेंगे कि भाजपा के एक स्थानीय सांसद ने पूरी तरह से इस योजना को नकार दिया है तो ऐसे में स्थानीय जनता में भ्रम क्यों पैदा किया जा रहा है। माहरा ने चिंता जताते हुए कहा कि उत्तराखण्ड बहुत ही संवेदनशील जोन में आता है। सेन्ट्रल एजेंसियां समय समय पर राज्य सरकार को सतर्क करती रही हैं। करन माहरा ने कहा कि चंद मुट्ठी भर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह षड्यंत्र रचा जा रहा है। माहरा ने आईडीपीएल में 50 वर्षो से भी अधिक समय से रिहाइश कर रहे लोगों को बेघर करने की सरकार की मंशा की भी निंदा की और कहा कि कांग्रेस पार्टी डोईवाला और आईडीपीएल के लोगों के साथ खड़ी है।

पूर्व काबीना मंत्री नवप्रभात ने कहा कि हमारी कांग्रेस की सरकार में शहरों के विकास के लिए यू हुडा संस्था (उत्तराखण्ड हाउसिंग डेवलपमेंट एजेन्सी) की स्थापना कर 500 करोड़ रुपये नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को निर्गत किए गये। भाजपा सरकार चाहती है कि बाहर के पूंजीपतियों और भूमाफिया के हाथों में उत्तराखण्ड को सौंप दिया जाए।

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