कांग्रेस-सपा की राजनीतिक ‘दलदल’ में खूब खिलेगी कमल की फसल!
तमाम अटकलों को दरकिनार कर यूपी में फिर हुआ लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन

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प्रियंका गांधी ने निभाई निर्णायक भूमिका, 17 सीटें मिलीं
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राजनीतिक विश्लेषकों की राय, दोनों पार्टियों को भुगतना होगा खामियाजा
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भाजपा को खुद ब खुद लगेगा खाद पानी, सपा और कांग्रेस के वोट में लगेगी सेंध
जन एक्सप्रेस । राज्य मुख्यालय
मौका मिलते ही एक दूसरे को टंगड़ी लगती आई सपा और कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले यूपी में एक बार फिर एक ही पाले में खड़ी हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद दोनों पार्टियों के बीच मनमुटाव दूर हो चुका है और समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 17 सीट देने पर राजी हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों और सपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार यह दोनों दल अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। इस लोकसभा चुनाव में इन दोनों पार्टियों का वोट बैंक टूटकर भाजपा के पक्ष में जाएगा। उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो गया है। दरअसल, राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के तेवर बदले हुए थे। इसके बाद वाराणसी लोकसभा सीट से उम्मीदवार देकर कांग्रेस को साफ संकेत दे दिया। दरअसल, वाराणसी से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है। ऐसे में सपा का कैंडिडेट आने के बाद माहौल गरमा गया। इसके बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की एंट्री हुई। उन्होंने अखिलेश यादव से बातचीत कर गठबंधन के लिए मनाया। अखिलेश यादव इस वार्ता के बाद मान गए। कांग्रेस के 17 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरने पर रजामंदी हुई है।
मुलायम सिंह को ब्लैकमेल कर समर्थन लेती रही कांग्रेस
इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने समय-समय पर सपा नेता स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव को अपने पक्ष में रखने के लिए हर दांव चला। फिर मामला न्यूक्लियर डील का हो या संसद में शक्ति प्रदर्शन का। यादव की मजबूरी रही हो या उनकी राजनीतिक सूझबूझ उन्होंने समय-समय पर कांग्रेस का साथ भी दिया।
सोनिया गांधी ने अखिलेश पर कराया था मुकदमा
कांग्रेस का शिकंजा स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव तक ही सीमित नहीं रहा। यूपीए सरकार में सत्ता का केंद्र रहीं सोनिया गांधी ने अखिलेश यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। दबाव में आए अखिलेश यादव को कांग्रेस के आगे सरेंडर करना पड़ा था। इसके बाद अखिलेश को खुद शपथ पत्र देना पड़ा था कोर्ट में, जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं कांग्रेसी हूं।
सपा ने कांग्रेस की जड़ें काट भाजपा को फायदा पहुंचाया
समाजवादी पार्टी ने भी कांग्रेस को जमकर नुकसान पहुंचाया। वैचारिक स्तर पर समाजवादी पार्टी कांग्रेस के करीब होने का हवाला देती रही इसी बीच उसने कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाई। यही कारण है कि लंबे अरसे से कांग्रेस यूपी में दोबारा अपना खोया जनाधार नहीं बना पाई। मामला सिर्फ अप तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस को कमजोर करने के लिए सपा ने यूपी से बाहर अपने प्रत्याशी उतारे। गुजरात में भी ऐसा होने पर वहां कांग्रेस कमजोर हुई और भाजपा और नरेंद्र मोदी को इसका बहुत फायदा मिला। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में भी सपा ने प्रत्याशी उतारे थे।
इस बार कांग्रेस का खुलकर विरोध करूंगा: विश्वनाथ चतुर्वेदी

पुराने कांग्रेसी, सोनिया गांधी के विश्वसनीय और पूर्व मुख्यमंत्री/रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ चुके विश्वनाथ चतुर्वेदी खुलकर कांग्रेस के विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को सुलझे हुए और वफादार साथियों की जरूरत नहीं है। वहां चाटुकारों और जी हजूरी करने वालों का बोलबाला है। कांग्रेस पार्टी ने 20 साल तक उनका उपयोग किया। चतुर्वेदी को स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव, स्वर्गीय सुब्रत रॉय, स्वर्गीय अमर सिंह, अनिल अंबानी समेत कितने ही लोगों से कानूनी रूप से लड़ाया। खिसिया कर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ में मेरा घर जमीदोज करा दिया। लगभग तीन दर्जन फर्जी मुकदमे दर्ज कराए। आय से अधिक संपत्ति मामले में समझौते का दबाव बनाने के लिए अखिलेश यादव की शह पर अभी भी मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं।
राजा भैया और अखिलेश पका रहे ‘खिचड़ी’
हजारों करोड़ रूपए के खाद्यान्न घोटाले के आरोपी प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और आय से अधिक संपत्ति मामले में घिरे अखिलेश यादव और मुलायम परिवार की भी नजदीकियां लोकसभा चुनाव से पहले बढ़ गई हैं। अखिलेश और राजा भैया अपने खिलाफ कोई भी कार्रवाई होने से पहले एकजुट होकर लोकसभा चुनाव में खुद की ताकत बढ़ाना चाहते हैं।






