बुजुर्ग ने लगाया जमीन हड़पने और फर्जी दानपत्र कराने का आरोप, डीएम से की कार्रवाई की मांग
हरदोई के सवायजपुर तहसील क्षेत्र में एक बुजुर्ग ने पड़ोसी दंपति पर धोखाधड़ी का आरोप

जन एक्सप्रेस/ हरदोई
हरदोई जिले के सवायजपुर तहसील क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति ने अपने ही गांव के दंपति पर धोखाधड़ी कर जमीन और मकान हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने इस पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मामला अरवल थाना क्षेत्र के ग्राम खंधेरिया, पोस्ट कुचिला का है। यहां के निवासी 60 वर्षीय गिरीशचन्द्र पुत्र द्वारिका प्रसाद ने आरोप लगाया है कि गांव के ही चन्द्रपाल और उनकी पत्नी विनीता ने उन्हें धोखे में रखकर उनकी संपत्ति अपने नाम करा ली। पीड़ित के अनुसार, आरोपी दंपति ने खुद को उनका करीबी संबंधी बताकर विश्वास में लिया और फिर सुनियोजित तरीके से उनकी जमीन और मकान पर कब्जा करने की साजिश रची।
गिरीशचन्द्र ने बताया कि वह अविवाहित हैं और लंबे समय तक कानपुर में रहकर काम करते रहे हैं। इसी दौरान आरोपियों ने उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए उनकी संपत्ति पर नजर गड़ा ली। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें डराने-धमकाने के साथ मारपीट तक की गई और जान से मारने की धमकी दी गई।पीड़ित का आरोप है कि एक सड़क दुर्घटना के बाद आरोपियों ने उन्हें इलाज के बहाने अपने साथ रखा। इसी दौरान उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल फोन, जेवर और नकदी पर भी कब्जा कर लिया गया। गिरीशचन्द्र का कहना है कि उन्हें पूरी तरह से आरोपियों के नियंत्रण में रखा गया, जिससे वे किसी से संपर्क भी नहीं कर सके।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने उन्हें विकलांग प्रमाण पत्र बनवाने का झांसा देकर सवायजपुर तहसील ले जाया। वहां पहले से मौजूद कुछ लोगों की मदद से उनकी जानकारी के बिना दानपत्र तैयार कराया गया और उनकी संपत्ति आरोपियों के नाम दर्ज करा ली गई। पीड़ित का कहना है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि सरकारी प्रक्रिया चल रही है, जबकि असल में उनसे जमीन संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए।गिरीशचन्द्र ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों ने न सिर्फ दानपत्र बनवाया, बल्कि संबंधित जमीन का दाखिल-खारिज भी अपने नाम करा लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीड़ित के पास न तो रहने के लिए घर बचा है और न ही जीवनयापन के लिए कोई साधन। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और इलाज तक के लिए पैसे नहीं हैं।
पीड़ित ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, धमकी और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही, उनकी जमीन और मकान उन्हें वापस दिलाया जाए। इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह एक गंभीर धोखाधड़ी और शोषण का मामला साबित हो सकता है, जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति को योजनाबद्ध तरीके से ठगा गया है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।






