
जन एक्सप्रेस /रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला को इस वर्ष भी जनपद रुद्रप्रयाग में पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के साथ मनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सोमवार को जिला कार्यालय सभागार में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में हरेला पर्व के सफल आयोजन को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि हरेला केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जागरूकता का महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने सभी विकासखंडों, तहसीलों, सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर 16 जुलाई को बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पौधरोपण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लगाए गए पौधों के संरक्षण और नियमित देखरेख की प्रभावी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। स्थानीय जलवायु के अनुरूप फलदार, छायादार और औषधीय पौधों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए।
प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. दिवाकर पंत ने सभी विभागों से अपनी-अपनी कार्ययोजनाएं शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा, ताकि अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने हरेला पर्व को जनआंदोलन का स्वरूप देने और अधिकाधिक वृक्षारोपण के माध्यम से हरित उत्तराखंड के संकल्प को साकार करने का भरोसा जताया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, जिला विकास अधिकारी अनिता पंवार, जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश मिश्रा, कृषि अधिकारी लोकेंद्र बिष्ट, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम प्रकाश, समाज कल्याण अधिकारी टी.एस. मलेठा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
हरेला पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष इस अवसर पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर हरित वातावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया जाता है।






