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मुख्यधारा की पार्टियां 50,000 निर्दाेष लोगों की हत्याओं के लिए जिम्मेदार-उपराज्यपाल

श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने सोमवार को भूमिहीनों को जमीन देने का विरोध करने वाली मुख्यधारा की पार्टियों पर यह कहते हुए हमला बोला कि ये लोग 50,000 निर्दाेष लोगों की हत्याओं के लिए जिम्मेदार हैं।

उपराज्यपाल ने श्रीनगर कन्वेंशन सेंटर में सुशासन के साथ पंचायत पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि ये लोग शांति को पचा नहीं सकते क्योंकि वे इसे नहीं चाहते हैं। वे लोगों को सड़क पर हिंसा को बढ़ावा देने, स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने के लिए उकसा रहे थे। उन्होंने कहा कि ये लोग जम्मू-कश्मीर में 40,000 से 50,000 निर्दाेषों की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं। हालाँकि, इस दौरान उन्होंने किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का नाम नहीं लिया।

प्रासंगिक है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने सवाल किया था कि जम्मू-कश्मीर में बेघर और भूमिहीन कौन हैं जबकि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी बेघरों को जमीन और घर आवंटित करने पर सवाल उठाए थे।

सरपंचों, पंचों, बीडीसी और डीडीसी से उपराज्यपाल ने कहा कि क्या वे एक भी ऐसे मामले का पता लगा सकते हैं जहां पीएमएवाई के तहत गैर-जम्मू-कश्मीर निवासी को जमीन या घर प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि बहुत शोर था कि जमीन गैर-जम्मू-कश्मीर निवासी को प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक भी गैर-जम्मू-कश्मीर निवासी को पीएमएवाई के तहत जमीन या घर उपलब्ध नहीं कराया गया है।

उपराज्यपाल ने कहा कि कुछ लोग यह सवाल पूछते रहते हैं कि पिछले चार साल में क्या बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर में शांति कायम होते नहीं देख सकते। सड़क पर होने वाली हिंसा जो कि नियमित थी, ख़त्म हो गई है और स्कूल, कॉलेज पूरे साल खुले रहते हैं। लोग सूर्यास्त के तुरंत बाद अपने घरों की ओर निकलते दिख जाते थे लेकिन आज रात 10 बजे के बाद भी रेस्तरां और होटल खुले हैं। लड़के, लड़कियां और यहां तक कि बुजुर्ग सहित युवा जेहलम नदी के किनारे पर संगीत बजाने या आइसक्रीम का आनंद लेने में समय बिताते हैं। यही बदल गया है। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में एक बड़ा बदलाव है।

उन्होंने कहा कि जो लोग शांति को पचाने में सक्षम नहीं हैं वे सड़क पर हिंसा को पुनर्जीवित करने के लिए किसी न किसी बहाने लोगों को भड़काते रहते हैं। उपराज्यपाल ने कहा कि पिछले चार साल में श्रीनगर में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम हुए लेकिन आज का पंचायती राज पर हुआ कार्यक्रम सबसे बड़ा है।

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