सेवानिवृत्ति पर विदाई नहीं… प्रकृति को दिया जीवन का नया संकल्प!

जन एक्सप्रेस / कर्णप्रयाग: 21 वर्षों की राजकीय सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हुईं शिक्षिका पदमा रावत ने अपनी विदाई को एक अनोखी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी याद में बदल दिया। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कल्याणा, गैरसैंण से सेवानिवृत्ति के बाद अपने पैतृक गांव माथर पहुंचीं पदमा रावत ने मैती समन्वयक राहुल चौहान के सानिध्य में सेब का पौधा रोपकर अपने शेष जीवन को समाज और पर्यावरण सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया।
पदमा रावत ने कहा कि जीवन केवल नौकरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लिए कुछ करना और सेवा-समर्पण की भावना को जीवित रखना भी जीवन का उद्देश्य है। उन्होंने ग्रामीणों से अपने शेष जीवन को गांव और क्षेत्र की सेवा के लिए समर्पित करने का वादा भी किया।
मां की सेवानिवृत्ति को बच्चों ने बनाया यादगार
इस अवसर पर दिल्ली से पहुंचे उनके बच्चे डॉक्टर आकांक्षा और अक्षांश ने भी पौधरोपण कर मां की सेवानिवृत्ति को यादगार बनाया। परिवार ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए इस अवसर को केवल विदाई समारोह तक सीमित नहीं रखा।
वहीं श्री हरेंद्र रावत के नेतृत्व में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर समिति दिल्ली/एनसीआर और घंडियाली परिवार के सहयोग से माथर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में 22 पौधे रोपे गए।
रुद्राक्ष, बेलपत्री और अश्वगंधा समेत लगाए गए पौधे
पौधरोपण अभियान के दौरान रुद्राक्ष, बेलपत्री, अश्वगंधा समेत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इस पहल ने सेवानिवृत्ति समारोह को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा का संदेश देने वाले कार्यक्रम में बदल दिया।
कार्यक्रम में क्षेत्र के सम्मानित व्यक्ति डॉक्टर शिशुपाल रावत, मैती संस्था के समन्वयक राहुल चौहान, दिगपाल रावत, नवीन रावत, गंभीर रावत, लक्ष्मण रावत सहित ग्रामीण और बच्चे मौजूद रहे।
नौकरी खत्म हुई, लेकिन सेवा का सफर जारी है—पदमा रावत की सेवानिवृत्ति की यही पहल गांव और समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बन गई।
– नरेंद्र रावत






