
जन एक्सप्रेस/ देहरादून: हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर मार्ग पर रविवार को हुई दुर्घटना के बाद जब विपक्षी दल सरकार को घेरने की तैयारी में थे, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इससे पहले ही बड़ा प्रशासनिक कदम उठाकर राजनीतिक पटल पर एक मजबूत संदेश दे दिया। सोमवार सुबह 10 बजे से पहले ही धामी ने अफसरों की आपात बैठक बुलाकर प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए उच्च स्तरीय समितियां गठित करने का आदेश जारी कर दिया।
एक तीर से दो निशाने:
मुख्यमंत्री के इस फैसले ने न केवल घटना से उपजे राजनीतिक दबाव को कम किया, बल्कि आम जनता के बीच भी उनकी प्रशासनिक तत्परता और संवेदनशीलता की छवि को मजबूत किया। गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के कमिश्नरों की अध्यक्षता में बनी इन समितियों को तत्काल प्रभाव से कार्य शुरू करने को कहा गया है। समितियां मंदिरों की दैनिक दर्शन क्षमता तय करने के साथ-साथ पंजीकरण प्रणाली लागू करने, मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा और भीड़ नियंत्रण की योजना बनाने पर काम करेंगी।
विपक्ष को पहले ही भांप लिया था:
हादसे के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल तीखे सवाल उठाने की तैयारी में थे, लेकिन सीएम धामी ने विपक्ष के सक्रिय होने से पहले ही जरूरी फैसले लेकर उन्हें अप्रभावी कर दिया। भाजपा ने भी सोशल मीडिया पर इसे व्यापक रूप से प्रचारित कर जनमानस को यह संदेश दिया कि सरकार सजग और जिम्मेदार है।
धामी की रणनीतिक सक्रियता कोई नई नहीं:
मुख्यमंत्री बनने के बाद जुलाई 2021 से अब तक पुष्कर सिंह धामी ने कई मौकों पर अपनी फुर्ती और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया है। चाहे प्राकृतिक आपदा हो, धार्मिक आयोजन या राजनीतिक संकट—धामी हर बार समय से पहले सक्रिय होकर संभावित विवादों को टालते रहे हैं।
जनता का समर्थन:
लोगों ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि मंदिरों में भीड़ प्रबंधन को लेकर जो कदम उत्तराखंड में उठाए गए हैं, वे देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकते हैं।
हरिद्वार हादसे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री धामी की सक्रियता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेहतर प्रशासन वही होता है जो संकट से पहले फैसले ले, न कि बाद में सफाई देता रहे। मंदिर समितियों का गठन न सिर्फ एक निवारक कदम है, बल्कि यह राजनीतिक दृष्टि से भी एक मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ है।






