पुलिस की आड़ में वसूली का खेल दो कास्टेबल गिरफ्तार, सुरेरी के तत्कालीन थानाध्यक्ष निलंबित.

जन एक्सप्रेस /जौनपुर :- पुलिस की वर्दी और पद की आड़ में जबरन वसूली और लूट के दो मामलों ने महकमे में खलबली मचा दी है। जलालपुर और सुरेरी थाने में दर्ज दोनों मुकदमों की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने महज 24 घंटे में कथित रूप से वारदात में शामिल पुलिसकर्मियों की पहचान कर ली। कार्रवाई करते हुए दो निलंबित आरक्षियों समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो नामजद आरोपितों ने पुलिस दबिश के दबाव में न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। मामले में सुरेरी के तत्कालीन थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक दिव्य प्रकाश सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
पुलिस के अनुसार, पहला मामला थाना जलालपुर में 17 सितंबर को दर्ज हुआ था। मुकदमा संख्या 416/2026 में संकीत सिंह, विकास और चार अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया। शिकायत के मुताबिक 15 सितंबर को संकीत सिंह पीड़ित को अपने साथ ले गया। वहां चार पहिया वाहन में पहले से मौजूद चार लोगों ने कथित तौर पर उसे जबरन वाहन में बैठाया और मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद रुपये की मांग की गई।
आरोप है कि पीड़ित का मोबाइल छीनकर यूपीआई के माध्यम से अलग-अलग खातों में करीब 2.15 लाख रुपये स्थानांतरित कराए गए। इसके अलावा एटीएम से भी रुपये निकलवाए गए। मामले में पुलिस ने नामजद आरोपितों की तलाश शुरू कर दी थी।
दूसरा मामला सुरेरी थाने में 22 सितंबर को दर्ज हुआ। मुकदमा संख्या 141/2026 में राजेंद्र दूबे निवासी फुलवरिया, थाना बड़ागांव, कमिश्नरेट वाराणसी को नामजद किया गया। मुकदमे में सादे कपड़ों में मौजूद बताए गए तीन-चार अज्ञात पुलिसकर्मियों और खाताधारक वंशनरायन गिरी को भी आरोपित बनाया गया है।
पुलिस के मुताबिक पीड़ित ने आरोप लगाया कि 13 सितंबर को राजेंद्र दूबे ने उसे फोन करके मिलने के लिए बुलाया था। वहां सादे कपड़ों में मौजूद तीन-चार लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और उसे वाहन में बैठाकर ले गए। आरोप है कि वहां करीब 1.65 लाख रुपये की वसूली की गई तथा यूपीआई के माध्यम से वंशनरायन गिरी के खाते में रकम स्थानांतरित कराई गई।
थानाध्यक्ष निलंबित, एसआईटी ने संभाली जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने तत्कालीन सुरेरी थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक दिव्य प्रकाश सिंह को 18 सितंबर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। दोनों मामलों की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए पुलिस उपमहानिरीक्षक, वाराणसी परिक्षेत्र ने 22 सितंबर को पांच सदस्यीय एसआईटी गठित की।एसआईटी अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आतिश कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में काम कर रही है। इसका नेतृत्व सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी नगर गोल्डी गुप्ता कर रही हैं। टीम में सह-विवेचक के रूप में एक निरीक्षक और एक उपनिरीक्षक भी शामिल हैं।
दो निलंबित आरक्षी समेत तीन गिरफ्तार
एसआईटी की जांच में पुलिस के अनुसार घटना में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आने के बाद 23 सितंबर को तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों में—
मनीष पटेल, निवासी कबीरुद्दीनपुर, थाना सुरेरी निलंबित आरक्षी सत्येंद्र कुमार गौड़, पूर्व तैनाती थाना सुरेरी निलंबित आरक्षी विष्णु सिंह, पूर्व तैनाती थाना सुरेरीशामिल हैं। पुलिस के मुताबिक दोनों आरक्षियों के खिलाफ जबरन वसूली, लूट के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में भी कार्रवाई की गई है।
दो नामजदों ने कोर्ट में किया आत्मसमर्पण
इसी बीच पुलिस की लगातार दबिशों के बाद जलालपुर प्रकरण में वांछित बताए जा रहे संकीत पुत्र रविंद्र प्रताप सिंह और विकास पुत्र रविंद्र प्रताप सिंह, दोनों निवासी मय पहाड़ी पट्टी, जौनपुर ने 23 सितंबर को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।इस तरह पुलिस के अनुसार दोनों मामलों में अब तक कुल पांच आरोपित गिरफ्तार या न्यायालय में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें दो पुलिस आरक्षी शामिल हैं।
जांच में सामने आए पुलिसकर्मियों के भी नाम
पुलिस का कहना है कि एसआईटी दोनों मामलों के प्रत्येक पहलू की जांच कर रही है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। विवेचना के दौरान अन्य आरोपितों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल बताया गया है। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी शीघ्र सुनिश्चित करने की बात कही है।मामले ने पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और विवेचना पूरी होने के बाद ही होगी।






