ऑफिस का तनाव घर न ले जाएं, शांतिकुंज में तनाव प्रबंधन शिविर का समापन
शांतिकुंज में तनाव प्रबंधन शिविर का समापन, 13 जिलों के 50 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण

जन एक्सप्रेस / हरिद्वार। ऑफिस के तनाव को घर तक न ले जाने और जीवन में परिस्थितियों के अनुसार सोच-समझकर प्रतिक्रिया देने की जरूरत पर जोर देते हुए शांतिकुंज में आयोजित दो दिवसीय तनाव प्रबंधन शिविर का समापन हुआ। शिविर में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों से 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।शांतिकुंज के व्यवस्थापक योगेंद्र गिरी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि तनाव को उतना ही लेना चाहिए, जितना व्यक्ति सहन कर सके। उन्होंने कहा कि नौकरी या कार्यक्षेत्र का तनाव ऑफिस में ही छोड़कर घर जाना चाहिए, ताकि उसका असर परिवार के माहौल पर न पड़े।
‘रुको, देखो, चलो’ का दिया मंत्र
योगेंद्र गिरी ने कहा कि कार्यक्षेत्र की परिस्थितियों को संभालने के लिए जीवन में सहजता और सरलता जरूरी है। उन्होंने युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन प्रबंधन संबंधी सूत्रों का उल्लेख करते हुए सकारात्मक बदलाव की शुरुआत स्वयं से करने पर जोर दिया।ट्रैफिक सिग्नल की तीन बत्तियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने जीवन में ‘रुको, देखो, चलो’ के सूत्र को अपनाने की बात कही। उनके अनुसार, किसी परिस्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ क्षण ठहरकर विचार करना तनाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।उन्होंने कहा कि समाज सेवा का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है और इसके लिए कार्यक्षेत्र की परिस्थितियों को समझदारी से संभालना आवश्यक है।
तनाव प्रबंधन, योग और अध्यात्म पर मार्गदर्शन
शिविर समन्वयक ने बताया कि दो दिनों तक चले प्रशिक्षण में अध्यात्म का महत्व, तनाव प्रबंधन, योग साधना और जीवन प्रबंधन समेत विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया गया।शिविर में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों के 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कार्यक्षेत्र और व्यक्तिगत जीवन में तनाव को बेहतर ढंग से संभालने के लिए विभिन्न व्यवहारिक एवं आध्यात्मिक पहलुओं से परिचित कराया गया।





