पलायन की पीड़ा के बीच धार्मिक आयोजनों से गुलजार हुआ मान्दरा गांव, लौट आई पुरानी रौनक
उत्तराखंड के टिहरी जनपद के मान्दरा गांव में धार्मिक आयोजनों के जरिए पलायन की मार झेल रहे
जन एक्सप्रेस / टिहरी गढ़वाल के घनसाली क्षेत्र के भिलंगना ब्लॉक स्थित मान्दरा गांव इन दिनों एक नई उम्मीद और उत्साह के साथ जीवंत हो उठा है। वर्षों से पलायन की मार झेल रहे इस गांव में अब धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से फिर से चहल-पहल देखने को मिल रही है।
मई और जून के महीनों में होने वाले धार्मिक कार्यक्रम गांव के लिए एक संजीवनी बनकर सामने आए हैं। रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर चुके लोग अब अपने पैतृक गांव लौट रहे हैं। इससे लंबे समय बाद परिवारों और रिश्तों में फिर से जुड़ाव देखने को मिल रहा है।
मान्दरा गांव, जहां लगभग 85 प्रतिशत लोग पलायन कर चुके हैं, वहां कई घर खंडहर में तब्दील होने की कगार पर हैं और खेत-खलिहान वीरान पड़े हैं। लेकिन इन दिनों गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया है।
सोमवार से गांव की विवाहित बेटियों यानी ‘ध्याणिंयों’ के सहयोग से दांणिया धाम स्थित घंटाकर्ण, हुणेश्वर और भैरव देवता मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा पुराण का आयोजन शुरू हुआ है। कथा वाचन द्वारिका प्रसाद पैन्यूली और आचार्य कमलेश्वर प्रसाद गैरोला द्वारा किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, प्रवासी परिवार और श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, 10 जून से गांव में तीन दिवसीय ग्रामोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे गांव के लोग शामिल होंगे। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी प्रतीक बनता जा रहा है।
ग्रामीण राजेंद्र नौटियाल का कहना है कि मान्दरा गांव पलायन की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन इस तरह के आयोजनों से लोगों का अपने गांव से जुड़ाव बढ़ता है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के दौरान भी लोगों ने अपने गांवों की ओर रुख किया था, जिससे यह साबित होता है कि जड़ों से जुड़ाव आज भी मजबूत है।
वहीं शिवानी ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से वे सभी विवाहित बहनें एक साथ अपने मायके में इकट्ठा हुई हैं। उन्होंने कहा कि पहले वे एक-दूसरे को ठीक से जानती भी नहीं थीं, लेकिन अब इस कार्यक्रम ने उन्हें आपस में जोड़ दिया है।
वीना रतूड़ी और रेखा रतूड़ी ने भी इस आयोजन को बेहद खास बताते हुए कहा कि इस तरह के अवसर न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि परिवार और समाज को भी एकजुट करते हैं।
आज जब पहाड़ों से लगातार पलायन हो रहा है, ऐसे में मान्दरा गांव की यह पहल एक सकारात्मक संदेश दे रही है। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए गांवों की रौनक लौट सकती है और लोग फिर से अपनी जड़ों की ओर वापस आ सकते हैं।






