
जन एक्सप्रेस नई टिहरी/प्रतापनगर : जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल ने मंगलवार को प्रतापनगर तहसील के ओखला गांव का दौरा कर आपदा प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और क्षेत्र में आपदा से हुई वास्तविक क्षति का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावितों की समस्याएं सुनीं और उन्हें हरसंभव सहायता व शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
क्षति का शीघ्र होगा मूल्यांकन, पुनर्वास पर होगा फोकस
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि: आपदा से हुई क्षति का तुरंत आंकलन करें और उसका विस्तृत प्राक्कलन (estimation) तैयार करें, ताकि सहायता समयबद्ध रूप से पहुंच सके।”उल्लेखनीय है कि प्रशासन द्वारा 27 अगस्त को 9 प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया था और राहत सामग्री भी वितरित की गई थी। जिलाधिकारी ने पुनः इन परिवारों से मुलाकात कर उनकी वर्तमान आवश्यकताओं का भी जायज़ा लिया।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में निरीक्षण, पढ़ाई और सुविधाओं पर दिया गया ज़ोर
सुजड़गांव स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने: वार्डन कक्ष, डाइनिंग हॉल, कंप्यूटर लैब और कार्यालय का निरीक्षण किया। छात्राओं से पढ़ाई और भोजन को लेकर प्रत्यक्ष संवाद किया।उन्हें पढ़ाई में मन लगाकर मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया।विद्यालय परिवार द्वारा फर्नीचर, इनवर्टर, स्मार्ट टीवी और वाद्ययंत्रों की मांग रखी गई, जिस पर जिलाधिकारी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
राजा के महल को पर्यटन और विरासत स्थल के रूप में देख रही जिला प्रशासन
प्रतापनगर में स्थित राजा के ऐतिहासिक महल का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी खण्डेलवाल ने इसे हैरिटेज स्थल के रूप में विकसित करने की संभावना पर विचार किया।उन्होंने एसडीएम प्रतापनगर को खाता-खतौनी की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।यदि यह संपत्ति सरकारी निकायों के अंतर्गत आती है तो इसे पर्यटन दृष्टि से संरक्षित और संवर्धित किया जा सकता है। इस निरीक्षण दौरे में कई प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी भी जिलाधिकारी के साथ मौजूद रहे: डीडीओ मो. असलम, एसडीएम प्रतापनगर मंजू राजपूत,एसडीएम कीर्तिनगर सौम्य गर्ब्याल,डीपीआरओ एम.एम. खान,बीडीओ श्रव्या गोयल,डीटीडीओ एस.एस. राणा,बीईओ प्रतापनगर,और अन्य सम्बंधित विभागीय अधिकारी।जिलाधिकारी का यह दौरा न केवल आपदा प्रभावितों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि शिक्षा, विरासत संरक्षण और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा में सकारात्मक पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।






