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मनसा देवी हादसे के बाद प्रशासन सख्त: तीन गुना बढ़ी सुरक्षा

SDM ने मांगे चश्मदीदों के बयान, अगले 7 कार्यदिवसों में सबूत पेश करने की अपील

जन एक्सप्रेस/हरिद्वार: रविवार को मनसा देवी मंदिर के पैदल मार्ग पर हुए भीषण भगदड़ हादसे में 8 श्रद्धालुओं की मौत और 45 के घायल होने के बाद हरिद्वार प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। मंदिर में सुरक्षा बलों की संख्या तीन गुना तक बढ़ा दी गई है। सोमवार से मंदिर में अब 18 पुलिसकर्मी और 6 एसडीआरएफ के जवानों की ड्यूटी लगाई गई है, जबकि हादसे के समय महज 6 पुलिसकर्मी तैनात थे।

भीड़ प्रबंधन को दुरुस्त करने के लिए अब रूट डायवर्ट किए गए हैं और संवेदनशील स्थानों पर विशेष पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है। होमगार्ड, SDRF और स्थानीय पुलिस का समन्वय बनाकर भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

चंडी देवी मंदिर भी सुरक्षा घेरे में:
मनसा देवी के साथ-साथ अब चंडी देवी मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। जहां पहले सिर्फ 6 पुलिसकर्मी तैनात थे, अब वहां 2 दरोगा, 2 हेड कांस्टेबल और 10 कांस्टेबलों की टीम लगाई गई है। SSP प्रमेन्द्र सिंह डोबाल के मुताबिक, “भीड़ लगातार बढ़ रही है, ऐसे में ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है और श्रद्धालुओं को संयम बरतने की अपील की जा रही है।”

मजिस्ट्रियल जांच शुरू, चश्मदीदों से मांगे बयान:
हरिद्वार DM के आदेश पर हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो चुकी है। SDM जितेंद्र कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्होंने आमजन से अपील की है कि जो कोई भी घटना का चश्मदीद है, उसके पास कोई भी मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य है, वह अगले 7 कार्यदिवसों में कलेक्ट्रेट भवन, रोशनाबाद स्थित उनके कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना बयान दर्ज करा सकता है।

इधर पुलिस ने भी मामले में FIR दर्ज कर जांच दरोगा प्रदीप कुमार को सौंपी है। जल्द ही प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

प्रशासनिक चूक पर उठे सवाल:
हादसे के बाद से ही श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। शुरुआती जांच में सामने आया कि रविवार को मंदिर परिसर में सुरक्षा बेहद कम थी, और पर्याप्त भीड़ नियंत्रण के इंतजाम नहीं थे। अब प्रशासन युद्धस्तर पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुटा है ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

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