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उत्तरकाशी के ‘सुपरफूड’ लाल धान पर बारिश की मार, किसान बेहाल; फसल सर्वे की मांग

उत्तरकाशी के लाल चावल पर बारिश का संकट, खड़ी और कटी फसल को नुकसान का डर; किसानों ने मांगा सर्वे

जन एक्सप्रेस / उत्तरकाशी। चंद्रप्रकाश बहुगुणा।उत्तरकाशी के रवांई क्षेत्र में प्रसिद्ध लाल धान की फसल पर लगातार बारिश का असर पड़ने की आशंका से किसान चिंतित हैं। कटाई के पीक सीजन में हुई दो दिन की बारिश से रामा सिरांई और कमल सिरांई क्षेत्र के किसानों के सामने फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।रवांई का लाल धान अपनी खास पहचान, स्वाद और पोषण संबंधी विशेषताओं के लिए जाना जाता है। स्थानीय स्तर पर इसे क्षेत्र की कृषि विरासत और प्रमुख फसलों में गिना जाता है। बाजार में इसकी मांग और कीमत भी सामान्य चावल की तुलना में अधिक बताई जाती है।

किसानों के अनुसार, खेतों में खड़ी पक चुकी फसल में अधिक नमी के कारण धान के खराब होने की आशंका है। वहीं, जिन किसानों ने धान काटकर खेतों में सुखाने के लिए रखा है, उनके सामने बारिश के कारण फसल के खराब होने का खतरा बना हुआ है। इससे किसानों की महीनों की मेहनत और लागत प्रभावित होने की चिंता है।

सैनिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष दर्मियान सिंह पंवार ने कहा कि लाल धान केवल एक फसल नहीं, बल्कि रवांई क्षेत्र की पहचान से जुड़ा है। उन्होंने सरकार से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की।उन्होंने मांग की कि प्रभावित गांवों में घर-घर और खेत-खेत सर्वे कराया जाए, खड़ी और कटी हुई फसल के नुकसान का अलग-अलग आकलन किया जाए तथा कृषि विभाग किसानों के लिए आवश्यक एडवाइजरी जारी करे। साथ ही किसानों को नियमानुसार फसल बीमा क्षतिपूर्ति जल्द उपलब्ध कराने की मांग की गई।

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नुकसान का आकलन और राहत की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो इस वर्ष लाल धान के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और संबंधित विभागों से किसानों को जल्द राहत और आवश्यक कृषि सलाह की उम्मीद है।

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