हरिद्वार/काशीपुर। रिपोर्ट -चंद्रप्रकाश बहुगुणा
अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में काशीपुर में देव संस्कृति के जागरण और संस्कारवान पीढ़ी निर्माण को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 16 अगस्त को मोनालिसा के निवास स्थान पर ब्रह्मवादिनी बहनों के कात्यायनि महिला मंडल द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गायत्री यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के माध्यम से परिवारों को भारतीय संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का संदेश दिया गया। यज्ञ कार्यक्रम के दौरान देव स्थापना की गई और नए परिवारों को गायत्री परिवार से जोड़ा गया। आयोजन में शांतिकुंज की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न सामाजिक एवं रचनात्मक अभियानों की जानकारी भी दी गई। इनमें वृक्षारोपण, नशा मुक्त भारत के लिए संकल्प पत्र अभियान तथा कन्या-किशोर कौशल प्रशिक्षण जैसे अभियान प्रमुख रहे। आयोजकों ने लोगों को इन अभियानों से जुड़कर समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान ‘प्रज्ञा अभियान’ पत्रिका और गुरुदेव के साहित्य का वितरण भी किया गया। लोगों से नियमित स्वाध्याय करने तथा भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में “हम बदलेंगे, युग बदलेगा” और “हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा” जैसे संदेशों के माध्यम से व्यक्तिगत सुधार को सामाजिक परिवर्तन का आधार बताया गया।
2000 से अधिक विद्यार्थियों को बांटी गईं पाठ्य पुस्तकें
वहीं, 17 अगस्त को शांतिकुंज की पहल पर भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 2026 को लेकर काशीपुर में व्यापक तैयारियां शुरू की गईं। परीक्षा के उद्देश्य को विद्यार्थियों में प्रखर विचार, नैतिकता, राष्ट्र गौरव और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने से जोड़कर देखा जा रहा है। अभियान के तहत काशीपुर क्षेत्र के 2000 से अधिक विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की पाठ्य पुस्तकें वितरित की गईं। इसमें राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रेलवे टांडा के करीब 80 प्रतिशत विद्यार्थियों को भी परीक्षा की तैयारी के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। गायत्री परिवार से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, महापुरुषों, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों से परिचित कराने का माध्यम है। उनका कहना है कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं के बीच सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और संस्कारों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।
3 अक्टूबर को होगी परीक्षा
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 2026 का आयोजन 3 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। इसके लिए विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराकर तैयारी का अवसर दिया जा रहा है। आयोजकों का उद्देश्य अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इस अभियान से जोड़ना है, ताकि शिक्षा के साथ-साथ उनमें संस्कार, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो। गायत्री परिवार के पदाधिकारियों ने कहा कि यज्ञ, स्वाध्याय और संस्कार शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनका कहना है कि नशामुक्त, सशक्त और संस्कारित भारत के निर्माण के लिए परिवार और विद्यालय दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। काशीपुर में चल रहा यह अभियान देव संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने के साथ बच्चों और परिवारों को भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। गायत्री परिवार का लक्ष्य है कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से हर घर, हर बच्चे और हर परिवार तक संस्कार एवं सकारात्मक विचारों का संदेश पहुंचे।






