ज्योतिष के मंच पर चमका चमोली का सितारा
डॉ. प्रदीप मैखुरी ने राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में रखा सारगर्भित व्याख्यान, ‘मन का कारक है चंद्रमा’

जिला संवाददाता – नरेंद्र रावत
जन एक्सप्रेस / कर्णप्रयाग : पहाड़ की माटी में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। अब ग्राम स्वर्का, लंगासू निवासी डॉ. प्रदीप मैखुरी ने ज्योतिष के क्षेत्र में अपनी विद्वता का परिचय देकर चमोली जिले का नाम रोशन किया है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, वेद-वेदांत शोध संस्थान एवं संस्कृत भारती, दिल्ली प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ज्योतिष कार्यशाला में डॉ. मैखुरी को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने ‘मानव जीवन पर चंद्रमा का प्रभाव’ विषय पर प्रभावशाली और सारगर्भित व्याख्यान दिया।
मन और भावनाओं से जुड़ा है चंद्रमा
डॉ. मैखुरी ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। जन्मकुंडली में चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक जीवन को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा की शुभ स्थिति मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच से जुड़ी मानी जाती है, जबकि प्रतिकूल स्थिति मानसिक अस्थिरता से संबंधित मानी गई है।
उन्होंने चंद्रमा के ज्योतिषीय महत्व और मानव जीवन पर पड़ने वाले विभिन्न प्रभावों को उदाहरणों के साथ समझाया। उनके व्याख्यान ने कार्यशाला में मौजूद प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया।
लक्ष्य से भटक रहे युवाओं को दिया संदेश
वर्तमान युवा पीढ़ी का जिक्र करते हुए डॉ. मैखुरी ने कहा कि आज अनेक युवा अपने लक्ष्य से भटक रहे हैं। ऐसे समय में मन को एकाग्र रखना, सकारात्मक सोच विकसित करना और सही मार्गदर्शन प्राप्त करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मन की स्थिति व्यक्ति के व्यवहार, विचार और निर्णय क्षमता को प्रभावित करती है।
व्याख्यान की हुई सराहना
कार्यशाला में डॉ. मैखुरी के विचारों को प्रतिभागियों ने गंभीरता से सुना और सराहा। उन्होंने ज्योतिषीय सिद्धांतों को मानव जीवन के व्यावहारिक पहलुओं से जोड़ते हुए विषय को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
श्री सतीश चंद्र मैखुरी के सुपुत्र डॉ. प्रदीप मैखुरी ग्राम स्वर्का, लंगासू के निवासी हैं। राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में उनकी सहभागिता को क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।






